ड्यूटी के दौरान केंद्र से निकली उज्बेकिस्तान की महिला, मुंशीगंज से बरामदगी, केंद्र प्रभारी की भूमिका और पुरानी शिकायतों की जांच जरूरी
रायबरेली। महिला सुरक्षा और संरक्षण के लिए संचालित वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां रखी गई उज्बेकिस्तान की एक महिला शनिवार शाम करीब पांच बजे सेंटर से निकल गई। घटना की जानकारी मिलते ही विभागीय अमले में हड़कंप मच गया। राहत की बात यह रही कि शहर कोतवाली पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए महिला को मुंशीगंज क्षेत्र से बरामद कर लिया, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कड़ी निगरानी के दावों के बीच विदेशी महिला सेंटर से बाहर कैसे निकल गई? घटना के समय केंद्र प्रभारी आस्था ज्योति सोनकर के ड्यूटी पर मौजूद होने की बात सामने आई है। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिस के अनुसार, उज्बेकिस्तान निवासी मदीना खों निशोनोवा ई-टूरिस्ट वीजा पर भारत आई थी। उसका वीजा 23 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो गया था, इसके बावजूद वह भारत में रह रही थी। मामले में प्रतापगढ़ निवासी राशिद उर्फ समीर को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने महिला के आधार कार्ड, पैन कार्ड और एटीएम जैसे भारतीय दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कराने में मदद की तथा महिला की गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल फोन से चैट और तस्वीरें मिटाकर साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया। पुलिस ने विदेशी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी को अदालत में पेश किया है। महिला को वापस भेजने की प्रक्रिया भी चल रही है। इस संवेदनशील प्रकरण में महिला को वन स्टॉप सेंटर में रखा गया था, जहां से उसका निकल जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। महिला अपनी मर्जी से बाहर निकली या किसी ने उसे ऐसा करने के लिए उकसाया, इसकी भी जांच होनी चाहिए। सेंटर प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर इससे पहले भी लापरवाही की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि पूर्व में भी केंद्र से महिलाओं के चले जाने की घटनाएं हुई थीं, लेकिन इसके बावजूद निगरानी व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है तो यह केवल एक कर्मचारी की चूक नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी और जवाबदेही का भी मामला होगा। नियुक्ति के समय लागू शासनादेश में सेंंटर प्रभारी के 24 घंटे केंद्र पर प्रवास से संबंधित शर्त होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि केंद्र प्रभारी रायबरेली के बजाय लखनऊ से आकर ड्यूटी करती हैं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पहले भी चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है। केंद्र प्रभारी ने पूर्व में इस्तीफा भी दिया था और बाद में दोबारा कार्यभार संभाल लिया। तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया गया था और फिर मामला रफा दफा कर दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केंद्र में रखी गई महिला की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी तय है, तो ड्यूटी के दौरान वह बाहर कैसे निकल गई? महिला की सुरक्षित बरामदगी के बाद अब महिला कल्याण विभाग के उच्चाधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। केंद्र प्रभारी की भूमिका, ड्यूटी रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और पूर्व शिकायतों की पड़ताल की जाए। यदि लापरवाही या नियमों की अवहेलना प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वन स्टॉप सेंटर महज एक कार्यालय नहीं, बल्कि संकट में फंसी महिलाओं के संरक्षण का ठिकाना है। यहां सुरक्षा में चूक को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।














