24.9 C
Raebareli
Wednesday, January 21, 2026

राष्ट्र-निर्माता का सम्मान

More articles

Raebareli bureau
Raebareli bureau
रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro

पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर नेहरू मेमोरियल के स्वरूप में बदलाव न करने की अपील की है। चिट्ठी में मनमोहन सिंह ने लिखा है कि नेहरू न सिर्फ कांग्रेस के बल्कि पूरे देश के नेता थे, इसलिए उनके म्यूजियम की प्रकृति और चरित्र को नहीं बदला जाना चाहिए। दरअसल सरकार तीन मूर्ति कॉम्पलेक्स में नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी की जगह को मिलाकर सभी प्रधानमंत्रियों के म्यूजियम स्थापित करने की तैयारी में है। इसमें कुछ गलत भी नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्रियों की स्मृति को संजोना किसी भी सरकार का फर्ज है। उनके कार्यों और योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराया ही जाना चाहिए। मगर क्या जवाहरलाल नेहरू को सिर्फ प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में देखना काफी होगा? पूरी दुनिया नेहरू की शख्सियत को इससे कहीं ज्यादा बड़ी मानती है। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के एक प्रमुख नेता तो वह थे ही, लेकिन इससे बढ़कर वह भारतीय राष्ट्र-राज्य के स्वप्नद्रष्टा और निर्माता थे। आजादी के बाद का भारत कैसा होगा, कौन सी व्यवस्था वह अपनाएगा, राजकाज का चरित्र क्या होगा, अर्थव्यस्था का मॉडल क्या होगा, इन तमाम पहलुओं को नेहरू ने एक व्यवस्थित रूप दिया और फिर सत्ता में रहते हुए इसे व्यवहार में उतारा। उन्होंने अपने आचरण से यह दिखाया कि एक सच्चा लोकतंत्र कैसे काम करता है। लोकतंत्र में विपक्ष की अहम भूमिका को स्वीकार करते हुए उन्होंने हमेशा ही विपक्षी नेताओं को पर्याप्त सम्मान दिया। संघवाद की गरिमा को बनाए रखने के लिए ही उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से लगातार बराबरी के स्तर का संवाद रखा और उनसे अहम मसलों पर सुझाव मांगे। उनकी लंबी उपस्थिति का ही नतीजा था कि भारत में जनतंत्र की जड़ें मजबूत होती गईं, जबकि दूसरी तरफ भारत के साथ स्वतंत्र हुए एशिया और अफ्रीका के लगभग सारे देश तानाशाही और सैनिक शासन के चंगुल में फंस गए। गुट निरपेक्ष आंदोलन ने उनकी अगुआई में ही जोर पकड़ा और भारत दुनिया के सभी विकासशील देशों की आशा का केंद्र बना। एक जनतांत्रिक बुद्धिजीवी के रूप में वे तमाम शैक्षणिक-सांस्कृतिक संस्थाओं की स्वायत्तता के पक्षधर थे। नेहरू मेमोरियल का निर्माण उन्हीं की अवधारणा के अनुरूप किया गया है। इसकी ख्याति एक संग्रहालय से कहीं ज्यादा शोध और अध्ययन के एक केंद्र के रूप में है। दक्षिण एशिया के तमाम गंभीर बुद्धिजीवियों और शोधकर्ताओं को यहां पत्र-पत्रिकाओं और पु्स्तकों का एक समृद्ध भंडार और एक ऐसा बौद्धिक माहौल मिलता है जो उनका मानसिक दायरा विस्तृत बनाता है। एक जमे-जमाए बौद्धिक केंद्र से किसी तरह की छेड़छाड़ करने से अच्छा होगा कि कुछ और संस्थान विकसित किए जाएं।

Raebareli bureau
Raebareli bureau
रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest