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Thursday, April 2, 2026

ग्रामीण हफ्तों से अंधेरे में रहने को मजबूर बिजली विभाग कि सुनने को राजी नहीं

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रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro

भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज ग्रामीण

सरेनी (रायबरेली)। जहां एक तरफ यूपी सरकार अपने आदेशों को लेकर सक्रिय नजर आती है वहीं उनके अधिकारी उनके आदेशों की हवा निकालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते नजर आ रहे हैं। अब इसे सरकार की नाकामी कहें या फिर अधिकारियों की तानाशाही या फिर उन्हें सरकार के आदेशों की जरा सा भी परवाह नहीं है। एक ओर जहां यूपी की योगी सरकार ने आदेश जारी कर रखा है कि यदि कहीं भी ट्रांसफार्मर जलता है तो उसे चौबीस घंटे के अंदर बदला जाए पर मैं योगी सरकार को बताना चाहता हूं कि सरेनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक ऐसा भी गांव है जहां चौबीस घंटे नहीं बल्कि दो सप्ताह होने को है लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जिम्मेदार सिर्फ तमाशबीन बने हुए मूकदर्शक की भूमिका अदा कर रहे हैं। मामला सरेनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित ग्राम काल्हीगांव का है जहां पर बीते दो वर्षों से ग्रामीण लो वोल्टेज जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं और हां बात सिर्फ लो वोल्टेज पर ही आकर नहीं समाप्त हो जाती है बल्कि समस्या यह भी है कि गांव में कम क्षमता के ट्रांसफार्मर रखे होने की वजह से विद्युत पोलों में लगे जर्जर तार रोजाना सार्ट सर्किट व टूटने की वजह से गांव में विद्युत आपूर्ति बाधित होती रहती है। और जब इसकी सूचना लाइनमैन या फिर पावरहाउस को दी जाती है तो वहां से बडी मिन्नतें करने पर किसी लाइनमैन को भेजा जाता है और ग्रामीणों से इस एवज में हर बार सुविधा शुल्क भी लिया जाता है यदि एक बार लाइनमैन को लाइन ठीक करने के एवज में ग्रामीणों द्वारा सुविधा शुल्क न दी जाए तो वह किसी भी कीमत पर आने के लिए दोबारा तैयार नहीं होता है फिर चाहे लाइनमैन से जेई कहें या फिर एक्सीयन साहब। ग्रामीणों का कहना है कि बीते दो सप्ताह पूर्व गांव में सौभाग्य योजना के तहत ट्रांसफार्मर रखकर लगभग सिर्फ सौ डेढ़ सौ मीटर नई लाइन बिछाकर उसे आगे उसी जर्जर तार वाली लाइन में जोड़ दिया गया और लाईन चालू कर दी गई नतीजा ट्रांसफार्मर लगने वाले दिन ही रात में जल गया और तब से लेकर अभी तक वह उसी स्थिति में बंद पड़ा हुआ है और उससे दो सप्ताह से विद्युत आपूर्ति बाधित है। दो सप्ताह पूरा होने को हैं लेकिन न अभी तक ट्रांसफार्मर बदला गया है और न ही ग्रामीणों को अभी कोई आशा है कि जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकती है। जबकि इस संबंध में एक्सीयन, जेई व ठेकेदार को ट्रांसफार्मर जलने की सूचना दी जा चुकी है लेकिन दो सप्ताह बाद भी नतीजा शून्य है। ग्रामीणों की मानें तो जेई को जब इस संबंध में जानकारी दी गई तो उन्होंने बताया कि यह कंपनी वालों का काम है यह उन्हीं के माध्यम से होगा इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता हूं यह कहकर उन्होंने इस गंभीर समस्या से किनारा कर लिया और जब इस संबंध में ठेकेदार को जानकारी दी गई तो उन्होंने एक सप्ताह में ट्रांसफार्मर बदलने की बात कही थी लेकिन दो सप्ताह होने को है स्थिति ज्यों का त्यों बनी हुई है। इस भीषण उमस भरी गर्मी में गांव में कम क्षमता वाले पुराने ट्रांसफार्मर व जर्जर तारों की वजह से रोजाना गांव में विद्युत आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे इस तपती गर्मी में सभी ग्रामीणों की हालत खस्ताहाल हो चुकी है। छोटे छोटे बच्चे व बुजुर्ग इस तेज उमस भरी गर्मी में बीमार हो रहें हैं और लो वोल्टेज व विद्युत आपूर्ति बाधित होने से घर पर लगे सबमर्सिबल पंप भी शोपीस बनकर रह गए हैं जिससे पीने की पानी की भी किल्लत समस्यात्मक रुप में हमारे सामने हैं और सभी विद्युत उपकरण भी ठप पडे हैं लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।जब दो सप्ताह पूर्व जले ट्रांसफार्मर के संबंध में जेई साहब से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि सौभाग्य योजना के तहत समस्त कार्य कंपनी के अंतर्गत आता है इससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है और एलएनटी नामक कंपनी यह कार्य देख रही है।जब इस संबंध में एक्सियन साहब से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने मीटिंग में हूँ बाद में बात करेंगे कहकर मसले से छुटकारा पा लिया और यह कोई नई बात नहीं है इससे पूर्व में भी जब एक्सियन साहब से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने मीटिंग में हूँ बाद में बात करुंगा कहकर बचते नजर आए। ग्रामीणों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि जब हमारी बात ठेकेदार नहीं सुनेगा, जेई नहीं सुनेगा, एक्सियन नहीं सुनेगा तो हम जाएं तो कहां जाए साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि क्षमता वृद्धि के लिए व इस समस्या से सत्तासीन विधायक जी को भी दो तीन बार अवगत कराया जा चुका है फिर भी अभी तक निराशा ही हांथ लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर अब वह किसकी चौखट में जाएं कि उन्हें इस विषम समस्या से निजात मिल जाए और अनसुनी न करते हुए कौन है जो उनकी इस समस्या का निराकरण कर सके।

अनुज मौर्य रिपोर्ट

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