रायबरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी पर अवमानना की तलवार लटका दी है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा है जिलाधिकारी द्वारा जान- बूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है।न्यायमूर्ति मनीष कुमार की अदालत ने कुलदीप बनाम राज्य सरकार मामले में जिलाधिकारी हर्षिता माथुर को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने माना कि 20 मई 2025 को पारित आदेश का जान-बूझकर पालन नहीं किया गया, जो सीधे-सीधे न्यायालय की अवहेलना है। कोर्ट ने याचिका कर्ता के अवमानना प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए 6 जनवरी 2026 को आदेश दिया है कि जिलाधिकारी 7 दिनों के भीतर आदेश का पालन करें और अगली तारीख तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें, अन्यथा उन्हें यह बताना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए? मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 को होगी। इस आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, जबकि आमजन में यह संदेश गया है कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है।
यह है पूरा मामला
यह पूरा मामला जिले के सलोन ब्लाक क्षेत्र स्थित अलीगंज डिहवा ग्राम सभा का है। इस गांव के ग्रामीणों ने डीएम को शपथ पत्र के साथ शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि “प्रधान शत्रोहन मौर्या व ग्राम विकास अधिकारी रामनरेश द्वारा विकास कार्यों के नाम पर रुपए निकालकर भ्रष्टाचार और घोटाला किया गया।” ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि “पंचायत भवन परिसर में सरकारी जमीन पर मौजूद एक चबूतरे पर ओपेन जिम सेंटर बनाने के नाम पर प्रधान ने सरकारी बजट से अपना आशियाना बनाकर इमारत में कब्जा कर लिया है। नाली, खडंजा, इंटरलाकिंग सहित कई विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपयों का सरकारी धन प्रधान शत्रोहन व ग्राम विकास अधिकारी रामनरेश ने मिलकर डकार लिया है।” इस मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी सौम्यशील सिंह और विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा ग्राम प्रधान तथा ग्राम विकास अधिकारी को जांच के नाम पर बचाने का पूरा प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कई बार जिलाधिकारी हर्षिता माथुर से भी मुलाकात की और किए गए भ्रष्टाचार से अवगत कराया। मामले में जब कोई ठोस हल नहीं निकला तो ग्रामीणों ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। राज्य सरकार के खिलाफ कुलदीप की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका संख्या 4667/2025 में 20 मई 2025 को हाईकोर्ट ने पंचायती राज अधिनियम 95 जी वन के तहत कार्यवाही किए जाने का आदेश डीएम हर्षिता माथुर को दिया। जिसके अनुपालन में जांच टीम गठित की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश पर भी जांच सही से नहीं की जा रही है। यह भी आरोप लगाया गया कि प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी द्वारा लाखों के सरकारी धन में किए गए घपले को दरकिनार कर आख्या में मूल तथ्यों से गुमराह कर दिया। शिकायतकर्ता मामले में अवमानना प्रार्थना पत्र संख्या 2957/2025 दाखिल किया। जिसकी सुनवाई में अवमानना न्यायालय के न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने डीएम को नोटिस जारी करते हुए कहा कि डीएम रायबरेली हर्षिता माथुर स्पष्ट करे कि रिट याचिका संख्या 4667/ 2025 में दिनांक 20.05.2025 को पारित आदेश की जान बूझकर अवज्ञा के लिए उसके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए?














