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Sunday, March 29, 2026

जानें करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त और नियम, ऐसे करें पूजा

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Anuj awasthi
Anuj awasthihttp://www.voiceofraebareli.com
Anuj Awasthi is a seasoned journalist and media professional with nearly two decades of experience in the field of journalism. He is currently serving as the Chief Editor of Voice of Raebareli and News Editor at Kanchan Today. He began his journalism career in 2006–07 with Bheera Express, marking the start of his long-standing engagement with grassroots and public-interest reporting. Over the years, Anuj Awasthi has worked with several well-known newspapers and publications, including United Bharat, Swatantra Bharat, Jansandesh Times, Dainik Hindustan, Shree Times, Daily News Activist, and Prakhar Vichar Patrika. His work spans reporting, editing, and editorial leadership, with a strong focus on social issues, local governance, and voices from the ground. Known for his commitment to factual journalism, editorial integrity, and public accountability, Anuj Awasthi continues to contribute actively to regional media, strengthening independent journalism at the grassroots level.

नेशनल डेस्क

सौभाग्यवती नारियों का सुंदर सुहाग पर्व करवा चौथ इस साल 4 नवंबर 2020 को है।इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद देखने के बाद अपना व्रत खोलती हैं।

इस दिन अगर सुहागिन स्त्रियां उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखी रहता है। ये व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है जिसे चांद निकलने तक रखा जाता है।

इस व्रत में सास अपनी बहू को सरगी देती है। इस सरगी को लेकर बहुएं अपने व्रत की शुरुआत करती हैं। इस व्रत में शाम के समय शुभ मुहूर्त में चांद निकलने से पहले पूरे शिव परिवार की पूजा की जाती है।

चांद निकलने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत को संपन्न करती हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ मनाया जाता है। करवा चौथ का व्रत सुहागन स्त्रियों के लिए बहुत खास होता है।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को ही करवा चौथ का व्रत है, इस साल कोरोना काल में करवा चौथ 4 नवंबर 2020 दिन बुधवार को मनाया जा रहा है। पति की दीर्घायु, यश-कीर्ति और सौभाग्य में वृद्धि के लिए इस व्रत को विशेष फलदायी माना गया है।

करवा चौथ शुभ मुहूर्त

4 नवंबर 2020 , बुधवार
शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक करवा चौथ की संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त है,
इस दिन चंद्रोदय शाम 7 बजकर 57 मिनट तक होगा।

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि

-सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें।

-करवा चौथ में महिलाएं पूरे दिन जल-अन्न कुछ ग्रहण नहीं करतीं फिर शाम के समय चांद को देखने के बाद दर्शन कर व्रत खोलती हैं।

-पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवे रखें।

-एक थाली में धूप, दीप, चंदन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं।

-पूजा चांद निकलने के एक घंटे पहले शुरू कर देनी चाहिए। इस दिन महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं।

-पूजन के समय करवा चौथ कथा जरूर सुनें या सुनाएं।

-चांद को छलनी से देखने के बाद अर्घ्य देकर चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए।

-चांद को देखने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना चाहिए।

कथा सुनने के बाद अपने घर के सभी बड़ों का चरण स्पर्श करना चाहिए।

पति की दीर्घायु की कामना कर पढ़ें यह मंत्र : –

‘नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।’

-इस दिन बहुएं अपनी सास को थाली में मिठाई, फल, मेवे, रुपए आदि देकर उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लेती हैं।

चंद्र को अर्घ्य दें तो यह मंत्र अवश्य बोलें….

करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा।
ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे।
सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया।
सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।

पूजन सामग्री में करवा चौथ के ‘पूजा का पाना’ तथा ‘करवा चौथ कथा की पुस्तक’ तो अवश्‍य होनी ही चाहिए, लेकिन कुल मिलाकर ऐसी 34 चीजें और भी हैं, जो इस व्रत की शुरुआत से लेकर व्रत खोलने तक उपयोग में आती हैं। पढ़कर एक बार मिलान जरूर करें, कि आपके पास कोई सामग्री कम तो नहीं है। और अगर है, तो उसे अपनी सूची में जल्दी से शामिल कर लीजिए –

करवा चौथ पूजन सामग्री की सूची

1. चंदन
2. शहद
3. अगरबत्ती
4. पुष्प
5. कच्चा दूध
6. शकर
7. शुद्ध घी
8. दही
9. मिठाई
10. गंगाजल
11. कुंकुम
12. अक्षत (चावल)
13. सिंदूर
14. मेहंदी
15. महावर
16. कंघा
17. बिंदी
18. चुनरी
19. चूड़ी
20. बिछुआ
21. मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन
22. दीपक
23. रुई
24. कपूर
25. गेहूं
26. शकर का बूरा
27. हल्दी
28. पानी का लोटा
29. गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी
30. लकड़ी का आसन
31. चलनी
32. आठ पूरियों की अठावरी
33. हलुआ
34. दक्षिणा के लिए पैसे ।

विशेष : चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें। पूजन के पश्चात आस-पड़ोस की महिलाओं को करवा चौथ की बधाई देकर पर्व को संपन्न करें।

श्रीरामचरित मानस के अयोध्या कांड में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है।

बारहिं बार लाइ उर लीन्ही। धरि धीरजु सिख आसिष दीन्ही॥
अचल होउ अहिवातु तुम्हारा। जब लगि गंग जमुन जल धारा॥

भावार्थ:-उन्होंने सीताजी को बार-बार हृदय से लगाया और धीरज धरकर शिक्षा दी और आशीर्वाद दिया कि जब तक गंगाजी और यमुनाजी में जल की धारा बहे, तब तक तुम्हारा सुहाग अचल रहे॥

अनुज मौर्य/मनीष श्रीवास्तव रिपोर्ट

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Anuj Awasthi is a seasoned journalist and media professional with nearly two decades of experience in the field of journalism. He is currently serving as the Chief Editor of Voice of Raebareli and News Editor at Kanchan Today. He began his journalism career in 2006–07 with Bheera Express, marking the start of his long-standing engagement with grassroots and public-interest reporting. Over the years, Anuj Awasthi has worked with several well-known newspapers and publications, including United Bharat, Swatantra Bharat, Jansandesh Times, Dainik Hindustan, Shree Times, Daily News Activist, and Prakhar Vichar Patrika. His work spans reporting, editing, and editorial leadership, with a strong focus on social issues, local governance, and voices from the ground. Known for his commitment to factual journalism, editorial integrity, and public accountability, Anuj Awasthi continues to contribute actively to regional media, strengthening independent journalism at the grassroots level.

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