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Saturday, February 14, 2026

नवगीतकार डाॅ. शिव बहादुर सिंह भदौरिया के जन्मदिन पर साहित्यकारों का सम्मान नवगीत का हब बन चुका है लालगंज बैसवारा: डाॅ. ओमप्रकाश अवस्थी

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रायबरेली ब्यूरो

लालगंज (रायबरेली)। काव्यलोक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि एवं नवगीतकार डाॅ.  शिव बहादुर सिंह भदौरिया जयंती कार्यक्रम समारोह पूर्वक मनाया गया। बैसवारा इंटर कालेज के गोविंदहाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार, संपादक व शिक्षाविद नरेंद्र सिंह ने कहा कि डाॅ. भदौरिया हिंदी जगत के मूर्धन्य गीतकार थे। उन्होंने अपनी साहित्यक साधना से बैसवारा के साहित्य को एक नई दिषा दी। बैसवारे की संस्कृति सभ्यता व साहित्य जगजाहिर है। उन्होंने बैसवारे की बोली एवं भाषा शैली, शब्दावली का जिक्र करते हुए कहा कि यहां की बोली में जो मिठास है वह अन्यत्र कहीं नहीं है।  मुख्य अतिथि श्री सिंह ने कहा कि डाॅ. भदौरिया के व्यक्तित्व में बैसवारे की माटी, भाषा, ज्ञान आदि सभी समाहित है। बैसवारे के साहित्य को अक्षुण्य बनाये रखना हमसभी का कर्तव्य है। इस अवसर पर फतेहपुर के डाॅ. ओमप्रकाश अवस्थी मूर्धन्य समीक्षक, साहित्यकार, आलोचक एवं अनेक ग्रन्थों का संपादन कर हिंदी साहित्य को ऊंची बुलंदियो पर पहुंचाया। इन्हें समारोह में आज डाॅ शिव बहादुर सिंह भदौरिया स्मृति सम्मान से नवाजा गया। जिसमें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिंह एवं अंगवस्त्र प्रदान किया गया। सम्मान से अभिभूत डाॅ अवस्थी ने कहा कि इस मंच से मै यह आहवान करता हूं की बैसवारा वासी आज से ही डाॅ. भदौरिया की स्मृति में एक ट्रस्ट का गठन करेगें। जिसके माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का और विस्तार हो सकेगा। उन्होने इसके लिये नगर के पूर्व चेयरमैन बच्चा बाबू से संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि डाॅ. भदौरिया ज्यो-ज्यो पुराने होते जायेगें त्यो-त्यो उनकी कविता का स्वाद निरंतर बढता जायेगा। उन्होंने कहा कि भाषा का संकट कवियों के समक्ष निरंतर आया तथा नवगीतकारो ने भाषा के आचंलिक तत्वों को उभारने का कार्य किया। उन्होंने 1955 में डाॅ भदौरिया द्वारा रचित ‘पुरवा जो डोल गई’ कृति ने डाॅ. भदौरिया को उच्च शिखर पर पहुंचा दिया। लालगंज आज नवगीत का हब बन चुका है। इस क्षेत्र से सर्वाधिक पंाच संकलन नवगीत के प्रकाशित हो चुके है। पटना के साहित्यकार नचिकेता ने कहा कि 1958 में नवगीत शब्द प्रकाश में आया। उन्होंने कहा कि डाॅ. भदौरिया नवगीत के उन हस्ताक्षरों में थे जिनके साथ लोगों ने नवगीत विधा सीखी। उन्होने नवगीत के इतिहास को लोगों से ठीक से समझने की अपील करते हुए कहा कि यदि नवगीत के इतिहास को समझा न गया तो इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। इस अवसर पर नचिकेता को डाॅ  शिव बहादुर सिंह भदौरिया सम्मान, साहित्यकार रामनारायण रमण डलमऊ को पं. ब्रजनंदन पाण्डेय सम्मान, साहित्यकार देवेंद्र पाण्डेय रायबरेली को डाॅ. उपेंद्र बहादुर सिंह स्मृति सम्मान, शिक्षक एवं व्यग्कार कवि हरिनाम सिंह को डाॅ. हरेंद्र बहादुर सिंह स्मृति सम्मान, साहित्यकार रामप्यारे श्रीवास्तव को नीलम स्मृति सम्मान प्रतिष्ठित नवगीतकार एवं प्रषासनिक अधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह चैहान लखनऊ को मधुकर खरे स्मृति सम्मान, कानपुर के प्रतिष्ठित कवि विनोद श्रीवास्तव को, दिनेश सिंह स्मृति सम्मान दिल्ली के नवगीतकार अवनीश सिंह चैहान को, डाॅ रामप्रकाश सिंह स्मृति सम्मान साहित्याकर, गीतकार सतीष कुमार सिंह को प्रषस्ति पत्र, स्मृति चिंह, अंगवस्त्र आदि से सम्मानित किया गया। काव्यलोक साहित्यक संस्था के महामंत्री डाॅ. विनय सिंह भदौरिया ने कहा कि यह कार्यक्रम निंरतर प्रतिवर्ष पूर्व की भांति चलता रहेगा। संचालन क्रमश आवनीश प्रताप सिंह, आचार्य सुरेन्द्र सिंह व प्रधानाचार्य रणधीर सिंह ने किया। इस अवसर पर स्वामी भास्कर स्वरूप अनंगपुरम रालपुर, डाॅ. एमडी सिंह, सुरेष नारायण सिंह बच्चा बाबू, रामबाबू गुप्ता चेयरमैन, डाॅ. रामहेत सिंह, पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह, बलदेव सिंह सागर, विष्णु दयाल सिंह चैहान, राजेष फौजी, रामप्रताप सिंह, विष्वास बहादुर सिंह, राहुल, लायक सिंह, नवल किषोर अवस्थी, जागेश्वर सिंह एडवोकेट, राजबली सिंह एडवोकेट, एपी सिंह, राजेश ,  मुनेष्वर सिंह सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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