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Tuesday, March 31, 2026

रहस्यमयी ढंग से लोगों की होती है इस मन्दिर में मनोकामनाएं पूर्ण

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रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro

हजारों वर्ष पुराने बिरनावां के नव दुर्गा आस्तीक मंदिर बना रहस्यमयी

रायबरेली। उत्तर प्रदेश में जगह जगह सैकड़ों नए पुराने वर्षो से मंदिर बने हुए हैं।जिनकी अपनी अलग अलग पाहचन है जो किसी न किसी उपलब्धि से प्रचलित होकर लोगो के दिलो में आस्था का प्रतीक बने हुए हैं जिनसे लोगो के कस्ट भी दूर होते हैं।ऐसा कई बार आपने सुना भी होगा और देखा भी गया है जिसकी शायद कल्पना भी नही की जा सकती हैं अगर देखा जाए तो प्रसिद्ध मंदिर की संख्या सैकड़ों में होगी ऐसा ही विशालकाय मंदिर के बारे मे हम आपको बताएंगे जिसकी कल्पना से कही बढ़कर मानी जाती है।जिसकी कई विशेषताए है।जो इस चैत्र नवरात्र में अपने 12 घंटे रात्रि जागरण के बाद लोगो से व मंदिर के पुजारी से मिली जानकारी से पता चलाकी इस हजारों वर्ष पुराने बने मंदिर में रहस्यमयी ढंग से लोगों की मनोकामना पूरी होती हैं बताते चलें कि रायबरेली करीब 40 किमी दूर डीह ब्लाक के बिरनावा में बने नव दुर्गा आस्तीक ठाकुर बाबा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। लोगों का मानना है कि आदि अनादि वर्षों से बना हुआ यह नव दुर्गा आस्तीक मंदिर काफी पुराना है जो पहले मिट्टी की दीवारों से निर्मित था जिसकी किसी को कोई गणना नहीं है फिलहाल मंदिर के सैकड़ों वर्ष पुराने पुजारी ने बताया था की मंदिर कि स्थापना 1931 में शीतला दास जी द्वारा की गई थी जीर्ण हो रहे इस मंदिर की नवनिर्मित स्थापना की गई की गई थी धीरे-धीरे इस मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ती गई और इस मंदिर के पुजारी की 10 वर्षों तक ही सेवा कर पाए उसके बाद वह अपनी इस गद्दी को अपने साथ के पुजारियों को सौंप कर चल बसे ।इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराने है ।जिसके बाद से इस मंदिर में सैकड़ों पुजारी आते रहे और इस मंदिर की सेवा करते रहे वर्तमान में मौजूद मंदिर के पुजारी महावीर शुक्ल ने से जब इस रहस्यमई मंदिर के बारे में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक मंदिर में एक ऐसी अद्भुत शक्ति है जो शायद बहुत ही कम जगहों पर होती है पुजारी का मानना है कि चाहे जिस भावना व भक्ती मनोकामना से लोगों का आवागमन होता है उन सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं पुजारी ने बताया कि इनका जन्मोत्सव नाग पंचमी के 1 दिन पहले चतुर्थी को मनाया जाता है जिसमें हजारों की संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और घर दर्शन अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं वैसे तो शुक्रवार सोमवार व पूर्णमासी तथा अमावस्या को लोग भी पूजा करने आते हैं मुख्य पर्व में शारदीय नवरात्रि चैत्र नवरात्रि के पूरे दिनों में नवरात्रि की पूजा विधिवत रूप से की जाती है इस मंदिर की कई संस्थाएं जो शक्ति पीठ के रूप में मानी जाती हैं इस मंदिर की एक श्रंखला लालू पुर गंगागंज में बने आस्तिक मंदिर है व देदौर ग्राम सभा में बनी दूसरी श्रृंखला है इसी प्रकार से और कई छोटी बड़ी श्रृंखलाएं हैं यह मंदिर सभी श्रंखला ओं का मुख्य मंदिर हैं लोगों का मानना है कि भूत प्रेत व अन्य समस्याओं के लिए विधिवत अगर पूजा अर्चना की जाए तो वह कोसों दूर हो जाती हैं परिक्रमा की जाती है जिससे लोगों के कष्टों का निवारण होता है इसी मंदिर के समीप ठीक पूर्व दिशा में एक बहुत बड़ी बाड़ी (तालाब )है।जिस के बीचो-बीच वर्षों पुराना एक मंदिर है जो हजारों वर्षों पहले जैसे था वैसे भी अभी तक बना हुआ है वर्षों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं पुजारी व ग्रमीणों का मानना है कि इस तालाब में विरोधियों ने दसियों बार पानी निकालने की चेष्टा की पर विफल रहे और इस तालाब का पानी ज्यों का त्यों बना रहा और अगर मुख्य रूप से देखा जाए तो यह मंदिर मौर्यवंश व विश्वकर्मा जाति के लोगों का कुल देवता का मंदिर भी माना गया है धीरे धीरे करके इस मंदिर में कई लोग अपनी भूमिका निभाने लगे और इस जीर्ण शीर्ण हो रहे मंदिर को नवनिर्मित व सुचारू रूप से चलाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया इस कमेटी का नाम श्री आस्तिक नवदुर्गा कमेटी बिरनावा है जिसमें करीब 12 सदस्य हैं जिसमे मुख्य रूप से नागेंद्र कुमार मिश्र, कुवँर सिंह तेज सिंह, राममिलन मौर्य ,रामसेवक मौर्य ,राजेंद्र सिंह, छेदीलाल वर्मा, जय गुरुदेव,और वर्तमान पुजारी महावीर शुक्ल जो इस समय इस मंदिर निस्वार्थ कार्यरत हैं इस मंदिर के अंदर एक बड़ी सी आम के लकड़ियों की लखारा बना हुआ है करीब पांच फीट का है मनोकामना पूर्ण होने पर लोगो द्वारा सैकड़ों चिराग चलाये जाते है।जो दुर्गा अष्टमी, नवरात्रों में में विशेष रूप से महत्व दिया जाता है। इसी नवरात्रि में कन्या भोज व लंगर की वेयवस्था की जाती है।व मंदिर में आये लोगों को ठहरने के लिए भी धर्मशाला का निर्माण भी किया गया है।कई मान्यतायें भी यहीं पूरी होती है जिसमे आने वाले लोगों को जो भूत प्रेत बाधा से ग्रसित रहते हैं ।उनकी सिद्धि के अनुसार। भजन कीर्तन कर उनको इस नवरात्रि में अग्रसारित कर उनके अंदर छुपे हुए कस्ट बाहर आते हैं। यही मंदिर के समीप एक यज्ञ शाला भी बनाई गई है जिसमे एक साथ कई लोग हवन कर सकते हैं।ऐसी कई विशेषताओं से यह मंदिर परिपूर्ण है।जो अब लोगों के लिए एक आस्था का प्रतीक बन रहा है।और अब चहुँ ओर चर्चा में बना है ये मंदिर।

अनुज मौर्य/शिवा मौर्य रिपोर्ट

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