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Tuesday, March 31, 2026

भू माफियाओं से सरकारी भूमि मुक्त नहीं करा पा रहा राजस्व विभाग

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Anuj awasthi
Anuj awasthihttp://www.voiceofraebareli.com
Anuj Awasthi is a seasoned journalist and media professional with nearly two decades of experience in the field of journalism. He is currently serving as the Chief Editor of Voice of Raebareli and News Editor at Kanchan Today. He began his journalism career in 2006–07 with Bheera Express, marking the start of his long-standing engagement with grassroots and public-interest reporting. Over the years, Anuj Awasthi has worked with several well-known newspapers and publications, including United Bharat, Swatantra Bharat, Jansandesh Times, Dainik Hindustan, Shree Times, Daily News Activist, and Prakhar Vichar Patrika. His work spans reporting, editing, and editorial leadership, with a strong focus on social issues, local governance, and voices from the ground. Known for his commitment to factual journalism, editorial integrity, and public accountability, Anuj Awasthi continues to contribute actively to regional media, strengthening independent journalism at the grassroots level.

हाई कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भू माफियाओं से मिलकर ठेंगा दिखा रहा राजस्व विभाग बड़े अधिकारी मौन

नसीराबाद रायबरेली- सरकारी भूमि पर किस तरह का कब्जा है यह बात किसी से छुपी नहीं है वह चाहे अधिकारी हो या नेता हो या आम जनता हो यहां तक की माननीय हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज को भी मालुम है पूर्व सरकारे उत्तर प्रदेश में रही सपा व बसपा सरकार के कार्यकाल में भू माफियाओं ने किस तरह सरकारी भूमि पर घर आदि बनाकर कब्जे दारी अपनाया है यह बात किसी से छुपी नहीं जिसकी शिकायत मिलने पर सत्ता में आते ही महंत योगी आदित्यनाथ मुख्यममंत्री ने खुले लफ्जों में राजस्व विभाग को आदेश दिया था कि किसी के द्वारा भी सरकारी भूमि तलाब चारागाह ओपला पाथने का स्थान आदि सरकारी जमीनों पर किसी के द्वारा भी कब्जा किया गया हो या मकान निर्माण कराया गया हो या किया जा रहा हो या किया गया हो तो तत्काल कार्रवाई करें शुरू शुरू में मुख्यमंत्री के आदेशों का अधिकारीयो ने पालन करते नजर आए पर जैसे जैसे ही समय गुजरता रहा वैसे वैसे ही साहब के आदेश का चिठ्ठा गुम फाइलों में ही दफन कर दिया गया जबकि आज से लगभग 50 वर्ष पहले अपने देश की सबसे सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने खुले लफ्जों में आदेश किया है कि सरकारी भूमि तालाब आदि जैसे सुरक्षित सरकारी जमीनों पर किसी प्रकार का कब्जा ना किया जाए और जिन लोगों ने किया है उन्हें तत्काल कब्जा मुक्त कर सरकारी जमीन सरकार अपने कब्जे में कर लें पर सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल एक बौना ही रह गया कहते हैं कि अदालत सर्वोपरि होती है जिसका फैसला हम सभी को मान्य होता है और मानना ही चाहिए पर 50 वर्ष पूर्व हुए इस आदेश पर आज तक पालन क्यों नहीं किया गया यह भी एक सवाल है आज भी बसपा सरकार में तलाब नंबर में हुए पट्टे पर कोई कार्यवाही नजर नहीं आ रही है जिन जिन लोगों का तालाब नंबर पट्टा हुआ है सभी लोग धान व गेहूं की फसलें लगाकर लाभवन्त हो रहे जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सभी तालाब नंबर खारिश समझे जाए इसके बावजूद भी लाखों की संख्या में आज भी लोगों का तालाब नंबर खेतौनी मे नाम दर्द है यह बात अलग है कि ch41- 45 मेन माना जाता है इसमें किसी का नाम न होकर केवल तालाब ही दर्ज है लेकिन सवाल यह है कि अगर ch41- 45 में तालाब दर्ज है तो तालाब खतौनी में लोगों का नाम आज भी क्यो दर्द है अभी लगभग 3 माह पहले गोरखपुर निवासी की एक याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त रवैया अपनाते हुए 75 जिलों के जिला अधिकारीयों समेत राजस्व परिषद चेयरमैन को तलब कर एक टीम बनाकर सरकारी सुरक्षित भूमि तालाब नंबर आदि पर कब्जा किए गए भू माफियाओं पर शिकंजा कसने को सक्त लफ्जों में आदेश जारी किया है आदेश में साफ साफ कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 50 वर्ष पहले जो आदेश जारी किया है आदेश पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई जो बहुत ही विडंबना की बात है कोर्ट ने कहां कि देश के सबसे बड़ी अदालत के आदेश के बावजूद भी जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है उन पर भी कार्यवाही की जाए कोर्ट ने 75 जिलो के 75 जिलाअधिकारियों को नोटिस भेजकर कार्रवाई कर 4 से 6 माह के अंदर हलफनामा दाखिल करने को कहा है राजस्व परिषद के चेयरमैन को तलब कर लंबी फटकार लगाई गई थी साफ लफ्जो में कहा गया था कि राजस्व परिषद द्वारा एक टीम गठित कर 4 से 6 माह में सभी जिला अधिकारियों से कार्यवाही करवाएं यह भी कहा गया था कि बसपा सरकार में जितने भी तालाब नंबर पर पट्टा किए गए हैं सभी को तत्काल प्रभाव से खारिज करते हुए सरकार अपने कब्जे में ले यहां तक की जितनी भी सुरक्षित जमीनें हैं सब पर कब्जा मुक्त करा कर अपने कब्जे में करते हुए कोर्ट मैं हलफनामा दाखिल करे हाईकोर्ट के इस आदेश को लगभग 3 माह से ज्यादा बीत गए हैं पर आज तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है विकास खंड छतोह क्षेत्र के लगभग दर्जनों ग्राम पंचायत जैसे सण्डहा, पूरे राई, हाजीपुर, सरांय, डीघा, तारापुर, कुढ़ा ,बढौना, अशरफपुर ,नसीराबाद, जमालपुर कोरिया, महमदपुर नमक सार कुवर मऊ आलमपुर आदि ग्राम पंचायतों में जमकर तालाब नंबर पर पट्टा हुए हैं यहां तक कि खलिहान हड्डावर, ओखला पाथने,चारा गाह आदि का स्थान सरकारी सुरक्षित जमीन खाली नहीं है सब पर भू माफियाओं के द्वारा कब्जा कर लिया गया है पिछले वर्ष तहसील परिसर में नायब तहसीलदार की पद पर रहे पवन कुमार शर्मा द्वारा अतिक्रमण अभियान चलाया गया था जो कुछ पर कार्रवाई हुई थी और कुछ मकान गिराए भी गए थे परंतु यह सिलसिला हफ्तों भर नहीं चल पाया और नायब तहसीलदार पवन कुमार शर्मा का तहसील ऊंचाहार तबादला कर दिया गया नायब तहसीलदार पवन कुमार शर्मा एक ईमानदार अधिकारी गिने जाते थे उक्त ग्राम पंचायतों में कई बार शिकायत कर्त्ताओं द्वारा शिकायत भी की गई और की जा रही लेकिन शिकायतों पर कोई अधिकारी गौर नहीं कर रहा ग्राम पंचायत डीघा में बब्बन खां वर्तमान सदस्य पति 3 माह से लगभग शिकायत कर रहे हैं पर कोई अधिकारी शिकायत पर गौर नहीं कर रहा बब्बन खां ने कहां कि जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुखिया महंत योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करूंगा जिले के मुखिया जिला अधिकारी शुभ्र सक्सेना का फोन कर पूरे मामले की जानकारी लेना चाहा तो फोन रिसीव ना हो सका।

मुस्तकीम अहमद रिपोर्ट

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Anuj Awasthi is a seasoned journalist and media professional with nearly two decades of experience in the field of journalism. He is currently serving as the Chief Editor of Voice of Raebareli and News Editor at Kanchan Today. He began his journalism career in 2006–07 with Bheera Express, marking the start of his long-standing engagement with grassroots and public-interest reporting. Over the years, Anuj Awasthi has worked with several well-known newspapers and publications, including United Bharat, Swatantra Bharat, Jansandesh Times, Dainik Hindustan, Shree Times, Daily News Activist, and Prakhar Vichar Patrika. His work spans reporting, editing, and editorial leadership, with a strong focus on social issues, local governance, and voices from the ground. Known for his commitment to factual journalism, editorial integrity, and public accountability, Anuj Awasthi continues to contribute actively to regional media, strengthening independent journalism at the grassroots level.

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