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Wednesday, February 11, 2026

फिर काम पर जेटली

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रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro

अरुण जेटली ने वित्त मंत्री का कार्यभार दोबारा संभाल लिया। किडनी ट्रांसप्लांट की वजह से तीन महीने वह कामकाज से दूर रहे और वित्त मंत्रालय का जिम्मा रेलमंत्री पीयूष गोयल ने संभाला। इन तीन महीनों में अर्थव्यवस्था की शक्ल इतनी बदल गई है कि अरुण जेटली को भी यह शायद अजनबी सी लगे। कई ऐसी चुनौतियां सामने आ खड़ी हुई हैं, जिनका अनुमान अप्रैल-मई में नहीं लगाया जा सकता था। चुनावी साल में जेटली को न सिर्फ इन चुनौतियों का सामना करना है, बल्कि जनता को लुभाने के लिए कई राहत उपाय करने हैं और साथ में अपनी सरकार के वित्तीय अनुशासन का रिकॉर्ड भी बेहतर दिखाना है। विपक्ष के इस प्रचार की काट भी उन्हें खोजनी है कि यूपीए शासन के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर मोदी सरकार से ज्यादा थी। उसके दावे का आधार नैशनल स्टैटिस्टिकल कमिशन (एनएससी) की एक उपसमिति द्वारा जारी आंकड़े हैं, जिनके मुताबिक 2006-07 में वृद्धि दर 9.57 प्रतिशत और 2011-12 में 10.08 प्रतिशत थी। अरुण जेटली ऐसे समय में वापसी कर रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हमारी अर्थव्यवस्था पर काफी प्रतिकूल असर डाल रही हैं। तुर्की की मौद्रिक गिरावट और अमेरिका व चीन में शुरू हुए करेंसी वॉर का असर यह दिख रहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही हैं। रुपये की हालत भी इसी वजह से खस्ता चल रही है। बीते हफ्ते अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया 70.32 प्रति डॉलर तक नीचे आ गया। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें लगातार ऊंची हो ही रही हैं। इन दोनों संकटों के चलते भारत का चालू खाता घाटा बढ़ गया है। इसे रोकने के आपात उपाय नहीं किए गए तो कुछ समय बाद भारत की कहानी के लिए यह एक बड़ा खलनायक बन जाएगा। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का बड़ा हिस्सा 30 से 50 डॉलर प्रति बैरल के तेल और 60 से 65 रुपये में मिलने वाले डॉलर के साथ बिताया है, लिहाजा महंगाई उसके लिए कोई बड़ी समस्या नहीं रही। यह सुविधा अगले आम चुनाव तक उसे नहीं मिलने वाली। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध का असर अभी पूरा खुलना बाकी है और यह हमारी मुश्किलें और बढ़ा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख से भारतीय निर्यातकों में बेचैनी अलग दिखाई पड़ रही है। चुनावी वर्ष में महंगाई रोकना और निवेश बढ़ाना हर सरकार के अजेंडे में सबसे ऊपर होता है। अरुण जेटली यह काम कैसे करते हैं, इसपर सबकी नजर होगी। मोदी सरकार के कई वादे अभी अधूरे हैं। 100 स्मार्ट सिटी, इंश्योरेंस फॉर ऑल और हेल्थ इंश्योरेंस जैसी बड़ी योजनाओं को अमली जामा पहनाया जाना बाकी है। जेटली के दोबारा वित्त मंत्रालय संभालने से पहले भारतीयों के विदेशों में जमा काले धन में गिरावट की खबर आ गई है। उनके वित्त मंत्री रहते ऐसी खबरों का टोटा नहीं पडऩे वाला।

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