पत्रकारिता के इस लंबे अरसे में तथ्य और सत्य ही रिपोर्टिंग का आधार रहा है। इसे ही सदैव प्राथमिकता पर रखा है। कुछ मामले दिल तक चोट करते हैं, मगर बेरहम लोगों के लिए यह मात्र ड्यूटी तक ही सीमित रहता है। आज एक घटना का जिक्र कर रहा हूं, जिसमें मेरी नजर में मानवता कानून से बड़ी होनी चाहिए बाकी खाकी ने तो अपने कानून को ही तरजीह दी है। रायबरेली के गुरुबक्शगंज थाने में वर्ष 2023 में दूसरों के घरों के जूठे बर्तन मांजकर जीवन यापन करने वाली एक 60 वर्षीय बेवा महिला के घर की जमीन पर एक दबंग होमगार्ड की नजर गड़ गई। उसे तरह तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा। एक दिन होमगार्ड सपरिवार उस पर टूट पड़ा और पिटाई कर दी। थानेदार ने नहीं सुनी तो महिला कप्तान के पास पहुंची। मटमैली धोती, नंगे पैरों में पड़ी बिवाईयों की मोटी-मोटी दरारें और दीन-हीन अवस्था देख तत्कालीन एसपी आलोक प्रियदर्शी ने सबसे पहले महिला के लिए एक जोड़ी चप्पलों की व्यवस्था की और उसकी फरियाद सुनी। मामले में एसपी ने एलआईयू से 4 घंटे में रिपोर्ट मांगी, रिपोर्ट में होमगार्ड की दबंगई की पुष्टि हुई, महिला का मुकदमा दर्ज किया गया। होमगार्ड ने भी 156 (3) का सहारा लिया और कोर्ट के आदेश पर महिला और उसके बेटे पर मुकदमा अपराध संख्या 412/23 धारा 452, 323, 504, 506 और 427 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। चूंकि कप्तान संज्ञानित थे इसलिए इस मुकदमे को पेशबंदी माना जा रहा था। इधर साहब बदल गए और उधर होमगार्ड का रसूख बोलने लगा, एक विवादित और वसूली के आरोपी थानेदार (जो गैर जनपद चले गए) ने 156 (3) के इस मुकदमे में चार्जशीट लगवा दी। मुकदमा खुला और न्यायालय में बुलावा हुआ, होमगार्ड के दबाव में महिला को एक भी तामीला नहीं कराया गया, उधर न्यायालय ने NBW जारी कर दिया। दुनिया की इस सबसे बड़े अपराधी के वारंट का तामीला गुरबक्श गंज थाने में तैनात दरोगा मुन्ना लाल मिश्रा को मिला। उन्होंने दबिश दी, घर पर कोई नहीं मिला। महिला का बेटा भी पढ़ा लिखा कम है उसने अपने गांव के एक दूसरे होमगार्ड से खीरों थाने से वसूली के आरोप में हटाए गए सिपाही जो अब गुरबक्शगंज में हैं, को फोन मिलवाया तो उस सिपाही ने कहा कोई बचा नहीं पाएगा लेकिन यह नहीं कह पाया कि वारंट है, 1500- 2000 हजार लेकर वारंटियों को रिकॉल की सलाह देने वाले दारोगा और सिपाही को बर्तन मांजने वाली औरत से निराशा ही हाथ लग रही थी फिर क्या था आगामी 26 जनवरी को इस वारंट तामीला के बदले गोल्ड 🏅 मेडल पाने की चाहत में मुन्ना लाल मिश्रा ने फोर्स के साथ सुबह 4 बजे दबिश देकर 60 साल की उस वृद्ध महिला को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को कोर्ट में हड़ताल होने के चलते जमानत नहीं हुई और महिला को जेल भेज दिया गया। लोगों के घरों के जूठे बर्तन मांज कर जीवन यापन करने वाली 60 वर्षीय महिला अब तीन दिन जेल में रहेगी, क्योंकि उसके बाहर रहने से देश की एकता और अखंडता को बड़ा खतरा है। 2000 लेकर वारंटी को वारंट रिकॉल कराने के बाद पर्ची जमा करने की सलाह देने वाले दारोगा मुन्नालाल मिश्रा अपने इस गुडवर्क पर फूले नहीं समा रहे हैं। आप अंदाजा लगाइए क्या इस महिला की जगह कोई पैसे वाला या रसूख दार व्यक्ति होता तो दारोगा जी इतनी ही ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाते..? खैर अब तो वृद्ध महिला जेल चली ही गई। दारोगा जी कानून की दुहाई देकर खुद को तीसमारखां साबित कर रहे हैं। पुलिस के लिए यह रोज का काम हो सकता है लेकिन एक साठ साल की महिला जिसने कथित अपराध ही नहीं किया उसके लिए तो जीवन के अंतिम समय में जेल जाना कभी न भूलने वाला ही होगा। जेल में वह कैसे सोएगी यह सोचकर उन्हें तो नींद आने से रही जो महिला और उसकी दीनता का सच जानते हैं। खैर दारोगा जी को यह समझना चाहिए कि “मानवता और कानून में मानवता सर्वोपरि है क्योंकि कानून का उद्देश्य ही मानव अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना है, हालांकि पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकार और कर्तव्य दोनों मिलते हैं। कानून व्यवस्था के लिए पुलिस बल का प्रयोग केवल अंतिम उपाय के रूप में और मानवाधिकारों के सम्मान के साथ होना चाहिए, क्योंकि पुलिस के अधिकार मानव अधिकारों से बड़े नहीं हैं, बल्कि उन्हें मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ही बनाया गया है।” उम्मीद है कि कप्तान साहब इस कर्तव्यनिष्ठा के लिए दारोगा मुन्नालाल मिश्रा और साथी सिपाही का सम्मान करेंगे और ऊंचाहार कोतवाली में वर्ष 2022 से प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के कोर्ट से जारी हो रहे वारंट (दीपक मौर्या पुत्र उमाकांत मौर्या निवासी जयरामपुर, मदारीगंज थाना ऊंचाहार, रायबरेली) को तामील कराने का आदेश देंगे, इस वारंट में पुलिस वर्षों से लगातार रिपोर्ट लगा रही है कि “वारंट तामीला हेतु उसके घर तथा अन्य संभावित स्थलों पर तलाश की गई। वारंटी उपरोक्त दस्तयाब नहीं हुआ। अग्रिम आदेश प्रदान करने की कृपा करें।”













