सरेनी(रायबरेली) धूरेमऊ गांव में विद्युत तार बदलने में किए गए भेद भाव पूर्ण रवैए से लोगों में आक्रोश है। दरसल इस गांव की आबादी लगभग आठ हजार है। खुले व नंगे तार बदलने की प्रक्रिया दो साल पहले की गई थी।किंतु गांव के दलित बाहुल्य आबदी पश्चिम टोले में केबिल नही डाले गए व पुराने तरीके से ही नंगे तार खुले छोड़ दिए गए जो कई स्थानों पर काफी नीचे लटके हुवे है। क्षेत्र पंचायत सदस्य अमित कुमार का कहना है इन नंगे लटके तारों से कभी भी दुर्घटना हो सकती है। विद्युत फॉल्ट होने की दशा मे ग्रामवासियों को चंदा लगाकर विद्युत कर्मियों को बुलाना पड़ता है तब कहीं उसकी मरम्मत हो पाती है।हालांकि उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवम जन प्रतिनिधियों का ध्यान इस बाबत कई बार दिलाया किंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुवि।जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
सन्दीप फ़िज़ा रिपोर्ट














