VB-G RAM G योजना को लेकर राहुल गांधी के बयान पर योगी के राज्यमंत्री का पलटवार
ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी यह योजना : दिनेश सिंह
रायबरेली। ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना (VB-G RAM G) को लेकर लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा किए हुए कटाक्ष पर योगी सरकार के राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि “रायबरेली के सांसद को पहले योजना के बारे में ठीक से।पढ़ना चाहिए। उन्हें न तो मनरेगा के बारे में पूरी जानकारी थी और न ही वीबी-जी राम जी योजना के बारे कुछ पता है।” राज्यमंत्री ने कहा कि “प्रधानमंत्री जी ने श्रमिकों के कल्याण और गाँवों के समग्र विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए इस योजना की शुरुआत की है। यह योजना देश के करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश परिवारों के जीवन से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। वीबी जी-राम जी कानून का उद्देश्य उन वास्तविक श्रमिक लाभार्थियों को सशक्त बनाना है, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों के कारण उनका हक नहीं मिल पाया।” अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से मुखातिब हुए राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि “अगर कोई जनहित की योजना है तो उसकी सही जानकारी जनता तक पहुंचना हर जनप्रतिनिधि का नैतिक दायित्व है। जनहित, राजनीति से सदैव ऊपर होना चाहिए। मगर राहुल गांधी इस योजना पर जनता को गुमराह करना चाहते हैं। वह नहीं चाहते हैं कि इस योजना की सही जानकारी हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचे, ताकि इसका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को मिल सके। इसलिए बिना जानकारी के योजना को गलत ठहराने की कोशिश में जुटे हुए हैं।” राहुल गांधी द्वारा अडानी-अंबानी का नाम लेकर की गई खिंचाई पर राज्यमंत्री ने कहा कि “राहुल को अडानी-अंबानी का फोबिया हो गया है। इन दोनों नामों के बिना उनका कोई भाषण पूरा नहीं होता। इस योजना से इन दोनों नामों का कोई ताल्लुक नहीं है लेकिन राहुल के पास योजना पर तथ्यात्मक पक्ष रखने की क्षमता न होने के कारण वह ऐसे बयान देते हैं। राहुल गांधी एक शिक्षित राजनैतिक बेरोजगार व्यक्ति हैं। बढ़ती उम्र और राजनीतिक असफलता के चलते राहुल का दिमागी संतुलन गड़बड़ा रहा है। इसीलिए वह वह सोचते कुछ और है, बोलते कुछ और हैं तथा करते कुछ और हैं। अब उनकी बातों को कोई संजीदगी से नहीं लेता। यह बीते लोकसभा चुनावों में भी साबित हो चुका है। सरकारें जनता के हित और समय की आवश्यकता के अनुसार योजनाओं के नाम बदलती रही हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं है।” राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने योजना की आवश्यकता, उद्देश्य और इसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए ग्रामीण भारत का मजबूत होना आवश्यक है। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अब ग्रामीणों को 100 दिन के बजाय 125 दिन का रोजगार मिलेगा। इससे ग्रामीण मजदूरों, गरीबों और जरूरतमंद परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, जिससे पलायन पर भी अंकुश लगेगा। जी राम जी योजना से ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा। 100 की बजाय 125 दिन काम मिलेगा, पारदर्शिता रहेगी। केंद्र सरकार इस योजना पर लगभग 97 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह राशि गांवों के समग्र विकास में उपयोग की जाएगी। योजना के तहत जल संरक्षण, कृषि संबंधी कार्य और पक्के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे ग्रामीण आधारभूत संरचना मजबूत होगी और गांव आत्मनिर्भर बनेंगे।” मंत्री ने कहा कि “विकसित भारत–जी राम जी योजना को आधुनिक AI तकनीक से जोड़ा गया है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और भुगतान प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।” मंत्री ने दावा किया कि इस योजना में शून्य प्रतिशत लीकेज होगी, जिससे हर लाभार्थी तक सीधा लाभ पहुंचेगा। उन्होंने जोर दिया कि “गांव तभी मजबूत होंगे, जब योजनाएं ईमानदारी और पारदर्शिता से लागू हों। इस योजना से करोड़ों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।” मंत्री ने कहा कि “विकसित भारत–जी राम जी” योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी और इसके माध्यम से गांवों की तस्वीर बदलेगी।”














