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Thursday, February 12, 2026

बिना नमाज के कबूल नहीं होता कोई नेक काम: मौलाना

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रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro

रायबरेली। पैगम्बर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम के जन्म दिवस के मुबारक मौके पर एदारा-ए-शरैय्या उप्र खिन्नी तल्ला की तरफ से विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी आयोजित जश्न आमदे मुस्तफा के 11 दिवसीय जलसे का दूसरा जलसा बाद नमाज इशा मोहल्ला चकभीखमपुर में अमीरे शरीयत उप्र हजरत अल्लामा अलहाज पीर अब्दुल वदूद फकीह संस्थापक जुलूसे मुहम्मदी के संरक्षण में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ आयोजित हुआ। जलसे की शुरूआत हाफिज फरीद अहमद अशर्फी ने कुरआन पाक की तिलावत से की। मौलाना मंसूर अहमद, मौलवी शाकिब रजा ने नात शरीफ पढ़ी।
जलसे के मुख्य वक्ता मौलाना नियाज अहमद वारसी बछरावां ने अपनी तकरीर में मजहबे इस्लाम की सबसे अहम इबादत नमाज पर प्रकाश डालते हुए लोगों को नमाज पढ़ने की ताकीद फरमाई और कहा कि नमाज से ही दुनिया व आखिरत में कामयाबी है। प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम ने फरमाया है कि नमाज दीन का खम्भा है और नमाज मेरे आंखों की ठण्डक है। नमाज बेहयाई और बुरी बातों से रोकती है। अल्लाह के रसूल ने फरमाया है कि इंसान चाहे जितना अच्छा अमल करे अगर वह नमाज नहीं पढ़ता है तो उसका कोई भी नेक काम अल्लाह के बारगाह में कुबूल नहीं होता। नमाज इंसान को पाक व साफ व चुस्त दुरूस्त रखती है। जलसे की अध्यक्षता मौलाना अरबीउल अशरफ नाजिमे आला एदारा-ए-शरैय्या उप्र व संचालन मौलाना मो. नासिर खां अशर्फी ने किया। सलातो सलाम व मौलाना अरबीउल अशरफ की दुआ पर जलसे का समापन हुआ। जलसे को सफल बनाने में मुख्य रूप से मो. वारिस, मो. सैफ, मो. इरफान, सोहैल अख्तर, रानू खान, मो. सगीर, सलीम अख्तर, इत्यादि लोगों का योगदान रहा।

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