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Wednesday, March 11, 2026

जानिए कर्नाटक के सिद्धगंगा मठ के महंत शिवकुमार स्वामी जिनके निधन पर तीन दिन के शोक का हुआ एलान

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रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro

बता दें कि शिवकुमार स्वामी का जन्म 1 अप्रैल 1907 को कर्नाटक के रामनगर जिले के वीरपुरा गांव में हुआ था. उनके अनुयायी उन्हें 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक बसावा का अवतार मानते थे.

नई दिल्ली: लिंगायत समुदाय के जाने माने धर्मगुरु और सिद्धगंगा मठ के महंत शिवकुमार स्वामी का 111 साल की उम्र में निधन हो गया है. लोग उन्हें जीवित ‘भगवान’ मानते थे. बता दें कि शिवकुमार स्वामी का जन्म 1 अप्रैल 1907 को कर्नाटक के रामनगर जिले के वीरपुरा गांव में हुआ था. उनके अनुयायी उन्हें 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक बसावा का अवतार मानते थे.

मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने धर्मगुरू के निधन पर प्रदेश में तीन का राजकीय शोक घोषित किया है, जिसमें से एक दिन की छुट्टी भी शामिल है. सरकार ने ये आदेश प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालयों के लिए जारी किए हैं.

कौन हैं कर्नाटक के शिवकुमार स्वामी

डॉ शिवकुमार स्वामी कर्नाटक के तुमकुरु में स्थित सिद्धगंगा मठ के महंत थे. वे लिंगायत समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु हुए. कर्नाटक में सबसे अधिक दबदबे वाले लिंगायत समुदाय की संख्या लगभग 18 फीसद हैं. कर्नाटक के सभी 30 जिलों में मठों का जाल फैला हुआ है. जातीय समीकरण के लिहाज से मठों का अपना प्रभुत्व और दबदबा है जो राजनीतिक दलों को उनकी ओर आकर्षित करता है.

शिवकुमार स्वामी का जन्म 1 अप्रैल 1907 को कर्नाटक के रामनगर जिले के वीरपुरा गांव में हुआ था. उनके अनुयायी उन्हें 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक बसावा का अवतार मानते थे. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बुहत काम किया है. वह सिद्धगंगा एजुकेशन सोसाइटी के प्रमुख भी थे. राज्य के लगभग 125 शैक्षणिक संस्थानों, इंजिनियरिंग कॉलेजों और बिजनेस स्कूलों तक का संचालन किया है.

कहा जाता है कि इनके वोटर्स 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव डालते हैं. इसलिए देश के बड़े-बड़े नेता भी स्वामी शिवकुमार के सामने सिर झुकाते थे.

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