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Monday, April 6, 2026

जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड से कम नहीं है मुंशीगंज किसान आंदोलन का महत्व

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रायबरेली ब्यूरो | Raebareli Bureau | Raebareli Beuro
  • शहीद स्मारक में किसान शहीद दिवस का हुआ आयोजन, अफसरों व नेताओं ने ज्ञात-अज्ञात शहीदों को किया नमन रायबरेली। 13 अप्रैल 1919 को अमृसर में हुये जलियांवाला बाग काण्ड में अंग्रेज जनरल डायर की बर्बरता से सभी वाकिफ हैं, लेकिन रायबरेली के मुंशीगंज काण्ड के बारे में कम ही लोग जानते हैं। यहां भी हजारों किसानों को गोरे सिपाहियों ने गोलियों से छलनी कर दिया था। 7 जनवरी 1921 को अंग्रेजों ने मुंशीगंज में सई नदी के तट पर निहत्थे किसानों पर गोलियां बरसाकर उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। इन निरीह किसानों के रक्त से नदी भी लाल हो गयी थी। रायबरेली का यह किसान आन्दोलन यद्यपि जलियांवाला बाग जितना चर्चित नहीं हुआ पर भारतीय राजनैतिक चेतना के विकास के क्रम में उसका महत्व किसी भी दृष्टि से जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड से कम नहीं है। जब भी इस देश का इतिहास किसान दृष्टि से लिखा जायेगा, रायबरेली अथवा अवध किसान के साहस, आत्म बलिदान से ओतप्रोत यश-गाथा गंगोत्री की तरह पवित्र और पूजनीय हो उठेगी। सोमवार को किसानों को याद करने के लिए शहीद दिवस का आयोजन किया गया। एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह, डीएम संजय कुमार खत्री, एसपी सुनील कुमार सिंह, एएसपी शशि शेखर सिंह सहित जिले के अधिकारियों ने शहिदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
    सात जनवरी 1921 को हुई मुंशीगंज गोलीकाण्ड की घटना दीर्घ कालीन पराधीनता की भयानक अंधेरी रात तथा भविष्य के सुदूर क्षितिज पर स्वतंत्रता सूर्य के उदय की प्राथमिक ऊषा के मध्य अवस्थित सेतु को पार करने में घटी एक लहूलुहान दुर्घटना के जीवन का इतिहास है। डीएम ने इस दौरान शहीद विधवाओं एवं उनके परिजनों का सम्मान किया। एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि मुंशीगंज गोलीकाण्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक परिस्थिति की पहली अंगडाई थी, जिसे सई तथा गंगा नदी के जल और सैकड़ों किसानों के ताजे रूधिर का तर्पण प्राप्त हुआ और इसीलिए यह काण्ड कालजयी बनकर अजर-अमर बन गया। उन्होंने कहा कि मुशीगंज गोली काण्ड का अध्ययन करें तो कहा जा सकता है कि यह संगठित किसानों द्वारा किया गया विद्रोह, जमींदारी तथा साम्राज्यशाही की जड़ों में मठ्ठा डालने की ऐतिहासिक प्रक्रिया का आदर्श अध्याय था। यदि असहाय तथा निर्धन किसानों के निहत्थे विद्रोह की गतिशीलता में आत्म संकल्प का सर्वोत्तम इस्पात इतना अधिक न गला होता तो मुंशीगंज गोलीकाण्ड के साथ उसका अस्तित्व भी समाप्त हो जाता और उसे राष्ट्रीय नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त करने में सफलता न प्राप्त होती। जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने कहा कि हमारे शहीदों ने आज के दिन अपने प्राणों की आहूति देकर अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष किया। यह दिन इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। जिलाधिकारी ने कहा कि हमे अपने शहीदों के संघर्ष को संजोकर रखने की आवश्यकता है। एसपी सुनील कुमार सिंह ने कहाकि किसानों का बलिदान रायबरेली के इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनकी गौरव गाथा पूजनीय है। इस दौरान बच्चों ने तमाम सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर मन मोह लिया। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष रामदेव पाल, बीएसए पीएन सिंह, बेसिक शिक्षा से एसएस पाण्डेय, सीएमओ डा. डीके सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट जयचंद पांडेय, सभासद पूनम तिवारी, अध्यक्ष अनिल मिश्रा, महांमत्री जय सिंह सेंगर, शिव बाबू शुक्ला, अमित मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे। संचालन सूर्यकांत मिश्र ने किया।
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